Wednesday, October 15, 2008

एक दाह संस्कार में अजीब घटना देखी गई। स्त्री के शव के पीछे रोता हुआ पति, पीछे एक कुत्ता और उसके पीछे सैकड़ों आदमियों की लम्बी लाइन।

एक आदमी ने उत्सुकतावश रोते हुए आदमी से कहा, भाई क्या हुआ ये लोग इस तरह लाइन में क्यों चल रहे हैं?

पति- मेरी पत्नी का देहांत कुत्ते के काटने से हुआ। लोगों की लाइन एक बार कुत्ते को अपने-अपने घर ले जाने के लिए लगी है।

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पति (पत्नी से)- हम किसी बात पर सहमत नहीं हो सकते क्या ?

पत्नी (पति से)- हो सकते हैं। इसी बात पर कि हम दोनों किसी बात पर सहमत नहीं हो सकते।

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पत्नी (गुस्से में)- आज तक तुमने अपनी जिंदगी में किया ही क्या हैं?

पति (गर्व से)- मैंने अपना जीवन खुद बनाया है।

पत्नी- लो, और मैं हूं कि अब तक ईश्वर को दोष दे रही थी।

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थप्पड़ मारने पर नाराज पत्नी को पति बोला- आदमी उसे मारता है जिसे वो प्यार करता है।

पत्नी ने पति को दो थप्पड़ मारे और कहा- आप क्या समझते हैं कि मैं आपसे प्यार नही करती।

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पत्नी (पति से): हाय! मेरे तो करम फूट गए, जो तुम्हारे पल्ले बंधी वर्ना मुझे तो एक से बढ़कर एक योग्य वर मिल रहे थे।

पति (दुखी होकर): हां वह सचमुच योग्य थे, जो तुम्हारे फंदे में फंसने से बच गए।

Wednesday, October 15, 2008 10:14:57 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

चमन लाल- डॉक्टर साहब, मैंने चाबी निगल ली।

डॉक्टर- कब?

चमन लाल- सर, करीब तीन महीने पहले।

डॉक्टर- तुम अब तक क्या कर रहे थे?

चमन लाल- में डुप्लीकेट चाबी इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन अब वो भी खो गई है।

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परसों रात तुम कहां थी, वकील ने युवती से पूछा।

युवती- अपने पड़ोसी के साथ रेस्तरां में खाना खाने गई थी।

और कल रात? वकील ने दूसरा सवाल पूछा।

एक दूसरे पड़ोसी के साथ।

और आज का तुम्हारा क्या कार्यक्रम है? वकील ने धीरे से पूछा।

ऑब्जेक्शन मी लॉर्ड दूसरा वकील चिल्लाया, यह सवाल मैंने पहले ही कर लिया है।

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संता (बंता से)- इतने खिलाड़ी क्यों फुटबॉल को लात मार रहे हैं?

बंता (संता से)- गोल करने के लिए।

संता- लेकिन बॉल तो पहले से ही गोल है और कितना गोल करेंगे।

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टीचर (राम से)- तुम मेरी कक्षा में सो नहीं सकते।

राम (टीचर से)- सर, सो तो सकता हूं अगर आप जोर से ना बोलें।

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रमेश (बेटे से)- अगर मेरे नदी में तैरने तक तुम एक ही जगह बैठै रहे, तो मैं वापस आकर तुम्हें 10 रुपये दूंगा।

बेटा (रमेश से)- और अगर आप वापस नहीं आ पाए, तो मैं पैसे मम्मी से ले लूं?

Wednesday, October 15, 2008 10:12:53 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Saturday, October 11, 2008

दोस्ती नाम नहीं सिर्फ़ दोस्तों के साथ रेहने का..
बल्कि दोस्त ही जिन्दगी बन जाते हैं, दोस्ती में..

जरुरत नहीं पडती, दोस्त की तस्वीर की.
देखो जो आईना तो दोस्त नज़र आते हैं, दोस्ती में..

येह तो बहाना है कि मिल नहीं पाये दोस्तों से आज..
दिल पे हाथ रखते ही एहसास उनके हो जाते हैं, दोस्ती में..

नाम की तो जरूरत हई नहीं पडती इस रिश्ते मे कभी..
पूछे नाम अपना ओर, दोस्तॊं का बताते हैं, दोस्ती में..

कौन केहता है कि दोस्त हो सकते हैं जुदा कभी..
दूर रेह्कर भी दोस्त, बिल्कुल करीब नज़र आते हैं, दोस्ती में..

सिर्फ़ भ्रम हे कि दोस्त होते ह अलग-अलग..
दर्द हो इनको ओर, आंसू उनके आते हैं , दोस्ती में..

माना इश्क है खुदा, प्यार करने वालों के लिये अभी
पर हम तो अपना सिर झुकाते हैं, दोस्ती में..

ओर एक ही दवा है गम की दुनिया में क्युकि..
भूल के सारे गम, दोस्तों के साथ मुस्कुराते

Saturday, October 11, 2008 11:03:59 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,

सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,

दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,

जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,

रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,

मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,

किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,

हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की वरना इस जमीं पर "भगवान" है दोस्ती

Saturday, October 11, 2008 10:57:49 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

एक दिन राजू के पापा एक रोबोट लेकर आए। वह रोबोट झूठ पकड़ सकता था और झूठ बोलने वाले को गाल पर खींचकर चांटा मार देता था।
आज राजू स्कूल से घर देर से आया था ...... पापा ने पूछा, ''घर लौटने में देर क्यों हो गई ?''
''आज हमारी एक्स्ट्रा क्लासेस थी'' - राजू ने जवाब दिया।
रोबोट अचानक अपनी जगह से उछला और राजू के गाल पर एक जोरदार चांटा मार दिया।
पापा हंसकर बोले, ''ये रोबोट हर झूठ को पकड़ सकता है। अब सच क्या है यह बताओ... कहां गए थे ?''
''फिल्म देखने'' - राजू ने गाल को सहलाते हुए जवाब दिया।
''कौनसी फिल्म'' - पापा ने कड़ककर पूछा ।
''जय हनुमान''
चटाक!..... अभी राजू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि उसके गाल पर रोबोट ने एक जोर का चांटा मारा।
''कौनसी फिल्म'' - पापा ने फिर पूछा ।
''कातिल जवानी''
पापा गुस्से में बोले, ''शर्म आनी चाहिए तुम्हें। जब मैं तुम्हारे जितना था तब ऐसी हरकत नहीं किया करता था।''
चटाक!..... रोबोट ने एक चांटा मारा .... इस बार पापा के गाल पर।
यह सुनते ही मम्मी किचन में से आते हुए बोलीं, ''आखिर तुम्हारा ही तो बेटा है न! झूठ तो बोलेगा ही''
अब मम्मी की बारी थी ........ चटाक !

Saturday, October 11, 2008 10:54:03 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

अभी शादी का पहला ही साल था,
ख़ुशी के मारे मेरा बुरा हाल था,

ख़ुशियाँ कुछ यूँ उमड़ रहीं थी,
की संभाले नही संभाल रही थी,

सुबह सुबह मेडम का चाय ले कर आना
थोड़ा शर्माते हुए हमे नीद से जगाना,
वो प्यार भरा हाथ हुमरे बालों मे फिराना,
मुस्कुराते हुए कहना की डार्लिंग चाय तो पी लो,

जल्दी से रेडी हो जाओ, आप को ऑफीस भी है जाना.
घरवाली भगवान का रूप ले कर आई थी,
दिल ओर दिमाग़ पर पूरी तरह छाई थी,
साँस भी लेते थे तो नाम उसी का होता था,
इक पल भी दूर जीना दुश्वार होता था.
.
.
.
5 साल बाद……..
.
.
.
सुबह सुबह मेडम का चाय ले कर आना,
टेबल पैर रख कर ज़ोर से चिल्लाना,

आज ऑफीस जाओ तो मुन्ना को
स्कूल छोड़ते हुए जाना…………..

एक बार फिर वोही आवाज़ आई,
क्या बात है अभी तक छोड़ी नही चारपाई,
अगर मुन्ना लेट हो गया तो देख लेना,
मुन्ना की टीचर्स को फिर ख़ुद ही संभाल लेना.

ना जाने घरवाली कैसा रूप ले कर आई थी,
दिल और दिमाग़ पे काली घटा छाई थी,
साँस भी लेते है तो उन्ही का ख़याल होता है,
हर समय ज़ेहन मैं एक ही सवाल होता है,
क्या कभी वो दिन लौट के आएँगे, हम एक बार फिर कुवारें नही हो सकते?

Saturday, October 11, 2008 10:52:05 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

ना ज़मीन, ना सितारे, ना चाँद, ना रात चाहिए,
दिल मे मेरे, बसने वाला किसी दोस्त का प्यार चाहिए,

ना दुआ, ना खुदा, ना हाथों मे कोई तलवार चाहिए,
मुसीबत मे किसी एक प्यारे साथी का हाथों मे हाथ चाहिए,

कहूँ ना मै कुछ, समझ जाए वो सब कुछ,
दिल मे उस के, अपने लिए ऐसे जज़्बात चाहिए,

उस दोस्त के चोट लगने पर हम भी दो आँसू बहाने का हक़ रखें,
और हमारे उन आँसुओं को पोंछने वाला उसी का रूमाल चाहिए,

मैं तो तैयार हूँ हर तूफान को तैर कर पार करने के लिए,
बस साहिल पर इन्तज़ार करता हुआ एक सच्चा दिलदार चाहिए,

उलझ सी जाती है ज़िन्दगी की किश्ती दुनिया की बीच मँझदार मे,
इस भँवर से पार उतारने के लिए किसी के नाम की पतवार चाहिए,

अकेले कोई भी सफर काटना मुश्किल हो जाता है,
मुझे भी इस लम्बे रास्ते पर एक अदद हमसफर चाहिए,

यूँ तो 'मित्र' का तमग़ा अपने नाम के साथ लगा कर घूमता हूँ,
पर कोई, जो कहे सच्चे मन से अपना दोस्त, ऐसा एक दोस्त चाहिए!

Saturday, October 11, 2008 10:48:31 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

कुछ रोचक तथ्य...

1. कई बीवियां रखने में एक फायदा है; वे अपने पति से लड़ने की बजाय आपस में ही लड़ती रहती हैं।

2. खूबसूरत औरत आंखों के लिये स्वर्ग है, आत्मा के लिये नरक है, और जेब के लिये दिवाला है।

3. दुनिया में तीन चीजें हैं जिन्हें औरतें नहीं समझतीं - आजादी, बराबरी और भाईचारा।

4. सच्चा प्रेम भूत की तरह है - चर्चा उसकी सब करते हैं, देखा किसी ने नहीं।

5. कायर के एक लिये एक साहसिक कार्य खुला हुआ है और वह है - शादी।

6. दुनिया में दो ही ट्रेजडी हैं : एक आप इच्छित वस्तु को पा न सकें; दूसरी उसे पा जायें।

7. पत्ते अच्छे हों तो आदमी ईमानदारी से खेलना पसंद करता है।

8. अगर आप किसी बार बार आने वाले दुष्ट से पिण्ड छुड़ाना चाहते हैं तो उसे कुछ पैसा उधार दे दीजिये।

9. मां को अपने बेटे को आदमी बनाने में बीस बरस लगते हैं और एक अन्य महिला उसे बीस मिनिट में बेवकूफ बना देती है।

Saturday, October 11, 2008 10:47:42 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

आज एक बार सबसे मुस्करा के बात करो
बिताये हुये पलों को साथ साथ याद करो
क्या पता कल चेहरे को मुस्कुराना
और दिमाग को पुराने पल याद हो ना हो

आज एक बार फ़िर पुरानी बातो मे खो जाओ
आज एक बार फ़िर पुरानी यादो मे डूब जाओ
क्या पता कल ये बाते
और ये यादें हो ना हो

आज एक बार मन्दिर हो आओ
पुजा कर के प्रसाद भी चढाओ
क्या पता कल के कलयुग मे
भगवान पर लोगों की श्रद्धा हो ना हो

बारीश मे आज खुब भीगो
झुम झुम के बचपन की तरह नाचो
क्या पता बीते हुये बचपन की तरह
कल ये बारीश भी हो ना हो

आज हर काम खूब दिल लगा कर करो
उसे तय समय से पहले पुरा करो
क्या पता आज की तरह
कल बाजुओं मे ताकत हो ना हो

आज एक बार चैन की नीन्द सो जाओ
आज कोई अच्छा सा सपना भी देखो
क्या पता कल जिन्दगी मे चैन
और आखों मे कोई सपना हो ना हो

Saturday, October 11, 2008 6:48:51 AM (India Standard Time, UTC+05:30)

एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं,
मैं.. खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता हूं,
मैं.. दोस्तॊं से दोस्ती तो हर कोई निभाता है.. दुश्मनों को भी अपना दोस्त बनाना चाहता हूं,
मैं.. जो हम उडे ऊचाई पे अकेले, तो क्या नया किया..
साथ मे हर किसी के पंख फ़ैलाना चाह्ता हूं,
मैं.. वोह सोचते हैं कि मैं अकेला हूं उन्के बिना.. तन्हाई साथ है मेरे,
इतना बताना चाह्ता हूं..
ए खुदा, तमन्ना बस इतनी सी है.. कबूल करना..
मुस्कुराते हुए ही तेरे पास आना चाह्ता हूं,
मैं.. बस खुशी हो हर पल, और मेहकें येह गुल्शन सारा अभी..
हर किसी के गम को, अपना बनाना चाह्ता हूं,
मैं.. एक ऐसा गीत गाना चाह्ता हूं,
मैं.. खुशी हो या गम, बस मुस्कुराना चाह्ता
इस छोटी सी जिन्दगी के,
गिले-शिकवे मिटाना चाहता हूँ,
सबको अपना कह सकूँ,
ऐसा ठिकाना चाहता हूँ,
टूटे तारों को जोड़ कर,
फिर आजमाना चाहता हूँ,
बिछुड़े जनों से स्नेह का,
मंदिर बनाना चाहता हूँ.
हर अन्धेरे घर मे फिर,
दीपक जलाना चाहता हूँ,
खुला आकाश मे हो घर मेरा,
नही आशियाना चाहता हूँ,
जो कुछ दिया खुदा ने,
दूना लौटाना चाहता हूँ,
जब तक रहे ये जिन्दगी,
खुशियाँ लुटाना चाहता हूँ

Saturday, October 11, 2008 12:04:53 AM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Thursday, October 09, 2008

आँखों में जल रहा है क्यूँ बुझता नहीं धुआँ
उठता तो है घटा सा बरसता नहीं धुआँ

चूल्हा नहीं जलाये या बस्ती ही जल गई
कुछ रोज़ हो गये हैं अब उठता नहीं धुआँ

आँखों से पोंचने से लगा आँच का पता
यूँ चेहरा फेर लेने से छुपता नहीं धुआँ

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमान ये घर में आयें तो चुभता नहीं धुआँ

Thursday, October 09, 2008 5:13:53 AM (India Standard Time, UTC+05:30)

वो जो शायर था चुप सा रहता था
बहकी-बहकी सी बातें करता था
आँखें कानों पे रख के सुनता था
गूँगी खामोशियों की आवाज़ें!
जमा करता था चाँद के साए
और गीली सी नूर की बूँदें
रूखे-रूखे से रात के पत्ते
ओक में भर के खरखराता था
वक़्त के इस घनेरे जंगल में
कच्चे-पक्के से लम्हे चुनता था
हाँ वही, वो अजीब सा शायर
रात को उठ के कोहनियों के बल
चाँद की ठोड़ी चूमा करता था

चाँद से गिर के मर गया है वो
लोग कहते हैं ख़ुदकुशी की है |

Thursday, October 09, 2008 5:13:04 AM (India Standard Time, UTC+05:30)

याद है इक दिन

मेरी मेज़ पे बैठे-बैठे

सिगरेट की डिबिया पर तुमने

एक छोटे से पौधे का एक स्केच बनाया था

आकर देखो

उस पौधे पर फूल आया है !

Thursday, October 09, 2008 5:12:18 AM (India Standard Time, UTC+05:30)

वो ख़त के पुरज़े उड़ा रहा था
हवाओं का रुख़ दिखा रहा था

कुछ और भी हो गया नुमायाँ
मैं अपना लिखा मिटा रहा था

उसी का इमान बदल गया है
कभी जो मेरा ख़ुदा रहा था

वो एक दिन एक अजनबी को
मेरी कहानी सुना रहा था

वो उम्र कम कर रहा था मेरी
मैं साल अपने बढ़ा रहा था

Thursday, October 09, 2008 5:11:24 AM (India Standard Time, UTC+05:30)
गुलज़ार


जन्म: 18 अगस्त 1936

उपनाम गुलज़ार
जन्म स्थान दीना, जिला झेलम (अब पाकिस्तान में)
कुछ प्रमुख
कृतियाँ
पुखराज, एक बूंद चाँद, चौरस रात, रवि पार, कुछ और नज़्में
विविध गुलज़ार का पूरा नाम समपूरन सिंह कालरा है। आप "त्रिवेणी" छंद के सृजक और हिन्दी फ़िल्म उद्योग के जाने-माने गीतकार हैं।

 

यह पन्ना, गुलज़ार को समर्पित है।

सभी से अनुरोध है कि यदी वो लोग अपनी तरफ़ से कुछ यहाँ प्रस्तुत करना चाहते हैं तो,

वो हमे अपनी ई-मेल भेज सकते हैं। रचना हिन्दी में लिखी हो तो बेहतर है।

sbhardwaj@kaimeetechnology.com

 

धन्यवाद:::
वेबमास्टर 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Thursday, October 09, 2008 4:50:16 AM (India Standard Time, UTC+05:30)

चिपचिपे दूध से नहलाते हैं

आंगन में खड़ा कर के तुम्हें ।

शहद भी, तेल भी, हल्दी भी, ना जाने क्या क्या

घोल के सर पे लुढ़काते हैं गिलसियाँ भर के


औरतें गाती हैं जब तीव्र सुरों में मिल कर

पाँव पर पाँव लगाए खड़े रहते हो

इक पथराई सी मुस्कान लिए

बुत नहीं हो तो परेशानी तो होती होगी ।


जब धुआँ देता, लगातार पुजारी

घी जलाता है कई तरह के छौंके देकर

इक जरा छींक ही दो तुम,

तो यकीं आए कि सब देख रहे हो ।

:: गुलज़ार ::

Thursday, October 09, 2008 4:38:40 AM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Sunday, October 05, 2008

अपनी फ़ितरत वो कब बदलता है
साँप जो आस्तीं में पलता है

दिल में अरमान जो मचलता है
शेर बन कर ग़ज़ल में ढलता है

मुझको अपने वजूद का एहसास
इक छ्लावा-सा बन के छलता है

जब जुनूँ हद से गुज़र जाये तो
आगही का चराग़ जलता है

उसको मत रहनुमा समझ लेना
दो क़दम ही जो साथ चलता है

वो है मौजूद मेरी नस—नस में
जैसे सीने में दर्द पलता है

रिन्द ‘गौतम’! उसे नहीं कहते
पी के थोड़ी-सी जो उछलता है.

Sunday, October 05, 2008 10:44:23 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

खोये-खोये-से हो हुआ क्या है?
कुछ बताओ ये माजरा क्या है?

भूल कर ख़ुद को भी नहीं चाहा
ये बताओ मेरी ख़ता क्या है?

जाये परदेस कोई फिर ये कहे
अजनबी क्या है, आशना क्या है

नाम लेते हैं तेरा जीने को
और फ़क़ीरों का आसरा क्या है?

दिल लगाते किसी से तो कहते
बेवफ़ाई है क्या वफ़ा क्या है

आदमीयत के जो पुजारी हैं
वो नहीं जानते ख़ुदा क्या है

पूछ लो प्यार करने वालों से
प्यार के जुर्म की सज़ा क्या है?

ग़म ज़ियादा हैं कम ख़ुशी ‘गौतम’!
और इस बज़्म में धरा क्या है?

Sunday, October 05, 2008 10:41:01 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

हंगामा है क्यूँ बरपा थोड़ी सी जो पी ली है
डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है

ना-तजुर्बाकारी से वाइज़ की ये बातें हैं
इस रंग को क्या जाने, पूछो तो कभी पी है

वाइज़= धर्मोपदेशक

उस मय से नहीं मतलब दिल जिस से है बेगाना
मक़सूद है उस मय से, दिल ही में जो खिंचती है

मक़सूद= मनोरथ

वाँ दिल में कि सदमे दो या जी में के सब सह लो
उन का भी अजब दिल है मेरा भी अजब जी है

हर ज़र्रा चमकता है अनवार-ए-इलाही से
हर साँस ये कहती हम हैं तो ख़ुदा भी है

अनवार-ए-इलाही= दैवी प्रकाश

सूरज में लगे धब्बा, फ़ितरत के करिश्मे हैं
बुत हम को कहे काफ़िर, अल्लाह की मर्ज़ी है

::: अकबर इलाहाबादी :::

Sunday, October 05, 2008 10:39:18 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

एक बूढ़ा नहीफ़-ओ-खस्ता दराज़
इक ज़रूरत से जाता था बाज़ार
ज़ोफ-ए-पीरी से खम हुई थी कमर
राह बेचारा चलता था रुक कर
चन्द लड़कों को उस पे आई हँसी
क़द पे फबती कमान की सूझी
कहा इक लड़के ने ये उससे कि बोल
तूने कितने में ली कमान ये मोल
पीर मर्द-ए-लतीफ़-ओ-दानिश मन्द
हँस के कहने लगा कि ए फ़रज़न्द
पहुँचोगे मेरी उम्र को जिस आन
मुफ़्त में मिल जाएगी तुम्हें ये कमान

::: अकबर इलाहाबादी :::

Sunday, October 05, 2008 10:36:48 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

उन्हें शौक़-ए-इबादत भी है और गाने की आदत भी
निकलती हैं दुआऎं उनके मुंह से ठुमरियाँ होकर

तअल्लुक़ आशिक़-ओ-माशूक़ का तो लुत्फ़ रखता था
मज़े अब वो कहाँ बाक़ी रहे बीबी मियाँ होकर

न थी मुतलक़ तव्क़्क़ो बिल बनाकर पेश कर दोगे
मेरी जाँ लुट गया मैं तो तुम्हारा मेहमाँ होकर

हक़ीक़त में मैं एक बुल्बुल हूँ मगर चारे की ख्वाहिश में
बना हूँ मिमबर-ए-कोंसिल यहाँ मिट्ठू मियाँ होकर

निकाला करती है घर से ये कहकर तू तो मजनू है
सता रक्खा है मुझको सास ने लैला की माँ होकर

                             ::: अकबर इलाहाबादी :::

Sunday, October 05, 2008 10:34:57 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

कल मैने खुदा से पूछा कि खूबसूरती क्या है?
तो वो बोले


खूबसूरत है वो लब जिन पर दूसरों के लिए एक दुआ है
खूबसूरत है वो मुस्कान जो दूसरों की खुशी देख कर खिल जाए
खूबसूरत है वो दिल जो किसी के दुख मे शामिल हो जाए और किसी के प्यार के रंग मे रंग जाए
खूबसूरत है वो जज़बात जो दूसरो की भावनाओं को समझे
खूबसूरत है वो एहसास जिस मे प्यार की मिठास हो
खूबसूरत है वो बातें जिनमे शामिल हों दोस्ती और प्यार की किस्से कहानियाँ
खूबसूरत है वो आँखे जिनमे कितने खूबसूरत ख्वाब समा जाएँ
खूबसूरत है वो आसूँ जो किसी के ग़म मे बह जाएँ
खूबसूरत है वो हाथ जो किसी के लिए मुश्किल के वक्त सहारा बन जाए
खूबसूरत है वो कदम जो अमन और शान्ति का रास्ता तय कर जाएँ
खूबसूरत है वो सोच जिस मे पूरी दुनिया की भलाई का ख्याल

Sunday, October 05, 2008 9:03:15 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Wednesday, September 17, 2008

बहते अश्को की ज़ुबान नही होती,
लफ़्ज़ों मे मोहब्बत बयां नही होती,
मिले जो प्यार तो कदर करना,
किस्मत हर कीसी पर मेहरबां नही होती.

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।

उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।

रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।

मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।

मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाये रखना ।

दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
अपनी आँखों में अश्को को बचा कर रखना ।

सूरज तो रोज ही आता है मगर ,
अपने दिलो में ' दीप ' को जला कर रखना ।

Wednesday, September 17, 2008 8:40:23 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Tuesday, September 16, 2008

जीवन में एक सितारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अंबर के आंगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छूट गए फ़िर कहाँ मिले
पर बोलो टूटे तारों पर
कब अंबर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में वह था एक कुसुम
थे उस पर नित्य निछावर तुम
वह सूख गया तो सूख गया
मधुबन की छाती को देखो
सूखी कितनी इसकी कलियाँ
मुरझाईं कितनी वल्लरियाँ
जो मुरझाईं फ़िर कहाँ खिलीं
पर बोलो सूखे फूलों पर
कब मधुबन शोर मचाता है
जो बीत गई सो बात गई

जीवन में मधु का प्याला था
तुमने तन मन दे डाला था
वह टूट गया तो टूट गया
मदिरालय का आंगन देखो
कितने प्याले हिल जाते हैं
गिर मिट्टी में मिल जाते हैं
जो गिरते हैं कब उठते हैं
पर बोलो टूटे प्यालों पर
कब मदिरालय पछताता है
जो बीत गई सो बात गई

मृदु मिट्टी के बने हुए हैं
मधु घट फूटा ही करते हैं
लघु जीवन ले कर आए हैं
प्याले टूटा ही करते हैं
फ़िर भी मदिरालय के अन्दर
मधु के घट हैं,मधु प्याले हैं
जो मादकता के मारे हैं
वे मधु लूटा ही करते हैं
वह कच्चा पीने वाला है
जिसकी ममता घट प्यालों पर
जो सच्चे मधु से जला हुआ
कब रोता है चिल्लाता है
जो बीत गई सो बात गई

                                                  —   हरिवंशराय बच्चन

Tuesday, September 16, 2008 6:08:35 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
 Sunday, September 14, 2008

ब्लैक होल का ख़तरा नहीं 

जेनेवा की मशीन चालू होते ही क्या पृथ्वी पर कोई ब्लैक होल बन जाएगा. अगर शीर्ष वैज्ञानिकों की मानें तो नहीं. लेकिन फिर भी कुछ गड़बड़ी की आशंका तो बनी हुई है ही. विज्ञान की कुछ पत्रिका तो इसे क़यामत की मशीन तक बता रही हैं.

स्विट्ज़रलैंड में जेनेवा के पास यूरोपीय मूलकण भौतिकी संस्थान सेर्न (CERN) संसार की एक ऐसी सबसे बड़ी प्रयोगशाला है, जिसने इस दिशा में क्रांतिकारी काम किये हैं और अब एक नयी ऊँचाई की ड्यौढ़ी पर खड़ी है. वहाँ पदार्थ के मूलकणों की गति बढ़ाते हुए उन्हें आपस में टकराने वाले संसार के अब तक के सबसे बड़े  ऐसे पार्टिकल एक्सिलरेटर (Particle Accelerator), अर्थात कणिका त्वरक का निर्माणकार्य पूरा होने वाला है, जो वैज्ञानिकों को ब्रह्मकण के दर्शन करा सकता है. लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर (Large Hadron Collider)-- LHC--नामक इस त्वरक की सहायता से वैज्ञानिक उत्तर पाने की आशा कर रहे हैं कि ब्रह्मांड कैसे बना, किस चीज़ का बना हुआ है और वह कौन-सी शक्ति है, जो इस दुनिया को, ब्रह्मांड को, बाँधे हुए है?  लेकिन परीक्षण से पहले ही इस पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं और यहां तक कहा जाने लगा है कि इससे पृथ्वी ब्लैक होल में बदल सकती है.

आशंका बेबुनियाद

27 किलोमीटर लंबी मशीनBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  27 किलोमीटर लंबी मशीन

लेकिन इस बीच पृथ्वी पर किसी ब्लैक होल के बनने और इसके नष्ट हो जाने की आशंका का पांच भौतिक वैज्ञानिकों ने एक साझे आकलन में खंडन किया है. उन्होंने लिखा है कि प्रकृति पृथ्वी पर अतीत में ऐसे लाखों प्रयोग कर चुकी है. इन वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रोटोन कणों को प्रकाश की गति से आपस में टकराने से यदि ब्लैक होल जैसे कोई कण बने भी, तो वे इतने सूक्ष्म होंगे कि तुरंत बिखर जायेंगे, क्योंकि उनमें अधिक समय तक बने रहने की ऊर्जा नहीं होगी. दो प्रोटोनों की टक्कर से जो ऊर्जा मुक्त होगी, वह दो मच्छरों के टकराने से पैदा हुई ऊर्जा के बराबर होगी, इसलिए कोई ऐसा ब्लैक होल नहीं बन पायेगा, जो पृथ्वी के अस्तित्व के लिए ख़तरा बन सके.

यहाँ इस समय एल एच सी नामक जिस महात्वरक को अंतिम रूप दिया  जा रहा है, वह वास्तव भूतल से कोई 100 मीटर की गहराई पर बनी 27 किलोमीटर लंबी एक वृत्ताकार सुरंग है, जिसमें तरह-तरह के पाइप, चुंबक, डिटेक्टर व अन्य उपकरण लगे हुए हैं.

15 मीटर लंबे, एक मीटर मोटे और 30 टन भारी पाइपों द्वारा आपस में जुड़े कुल 12 सौ अतिशक्तिशाली महाकाय चुंबक इस सुरंग में हइड्रोजन-नाभिकों, अर्थात प्रोटोनों को अपने चुंबकीय क्षेत्र में बनाए रखते हुए उनकी गति को त्वरित करेंगे और उन्हें आपस में टकराने पर विवश करेंगे. इस टक्कर से ऐसी परिस्थितियाँ पैदा होंगी, जैसी सृष्टि के जन्मदाता महाधमाके के समय रही होंगी और वैज्ञानिकों को भौतिक विज्ञान के कुछ मूलभूत प्रश्नों के उत्तर दे सकेंगी.

"हम यह जानने की आशा कर रहे हैं कि मूलकण किस चीज़ के बने हैं, इसकी व्याख्या करने वाला भौतिक शास्त्र का सर्वस्वीकृत मॉडल सही है या उसमें कोई फेरबदल करने पड़ेंगे. यह मॉडल, उदाहरण के लिए, यह नहीं बताता कि मूलकणों का एक निश्चित द्रव्यमान क्यों होता है? हम यह भी जानना चाहते हैं कि हिग्स-बोसोन  (Higgs-Boson) कहलाने वाले और भी सूक्षम कणों का अस्तित्व है भी या नहीं." -भौतिक वैज्ञानिक  फ़िलिप लेब्रून

क्या है सेर्न

मैर्केल भी देख चुकी हैं मशीनBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  मैर्केल भी देख चुकी हैं मशीन

हिग्स को ही इस समय ब्रह्मांड का ब्रह्मकण माना जा रहा है. समझा जाता है कि इस प्रकण के मिल जाने से इस प्रश्न का भी उत्तर मिल जायेगा कि क्वार्क (Quarks) और इलेक्ट्रॉनों को अपना द्रव्यमान (भार) कहाँ से मिला.

हिग्स-बोसोन मिल गये तो समझ लीजिये कि नोबेल पुरस्कार भी मिल गया. भौतिक विज्ञान के तथाकथित स्टैंडर्ड मॉडल का यही वह मर्म है, जिसकी सहायता से मूलकण भौतिकी के सारे प्रश्नों के उत्तर दिये जाते हैं, पर जिनका अस्तित्व अभी तक किसी प्रयोगशाला में सिद्ध नहीं किया जा सका है. अब तक की प्रयोगशालाओं के त्वरक संभवतः इतने शक्तिशाली नहीं थे कि वे आपस में टराने वाले प्रोटोनों को पर्याप्त त्वरण-ऊर्जा प्रदान कर पाते.

सेर्न मूलकण भौतिकी के क्षेत्र में अनुसंधान का  विश्व का पहला केंद्र था. उसकी स्थापना यूरोप के 12 देशों ने मिल कर 1954 में की थी. इस समय फ्रांस के रोबेयर ऐयमार (Robert Aymar) उसके निदेशक हैं, किंतु 2009 में जर्मनी के रोल्फ़-डीटर स्विट्ज़रलैंड में सेर्न मुख्यालयBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  स्विट्ज़रलैंड में सेर्न मुख्यालय

होयर (Rolf-Dieter Heuer) निदेशक का पदभार संभालेंगे. इस समय 20 यूरोपीय देश सेर्न के सदस्य हैं और कोई तीन हज़ार लोग उसके नियमित कर्मचारी हैं. हर वर्ष दुनिया भर से लगभग 6 हज़ार वैज्ञानिक वहाँ शोधकार्य करने आते हैं. आज हम जिसे World Wide Web या Internet कहते हैं, उसका जन्म भी लगभग दो दशक पूर्व इसी प्रयोगशाला में हुआ था.

कैसे होगा प्रयोग

सेर्न का नया महात्वरक  एल एच सी प्रटोनों को लगभग प्रकाश जितनी गति प्रदान कर सकेगा--यानी लगभग तीन लाख किलोमीटर प्रतिसेकंड की गति. 27 किलोमीटर लंबी भूगर्भीय त्वरण रिंग में चल रहे आधे प्रोटोन घड़ी की सुई की अनुलोम और आधे विलोम दिशा से आते हुए  जहाँ आपस में टकरायेंगे, वहाँ एक बहुत ही कम समय के लिए एक बेहद घनी चिन्गारी- जैसी हरकत पैदा होगी. अनुमान है कि इस क्षणिक चिन्गारी में कुछ ऐसे नये कण,  प्रकण या उपकण हो सकते हैं, जो वैज्ञानिकों को सुराग दे सकते हैं कि वे सबसे मूल ईंटें कौन-सी हैं, जिनसे अणु-परमाणु और उनके इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन-जैसे संघटक अवयव बनते हैं और साथ ही  आपस में बाँधे भी रहते हैं.

प्रोटोनों की टक्करBildunterschrift: Großansicht des Bildes mit der Bildunterschrift:  प्रोटोनों की टक्कर

प्रोटोनों को  त्वरण रिंग में प्रति सेकंड 11 हज़ार बाहर एक-दूसरे की उलटी दिशा में दौड़ाया जायेगा और वे प्रति सेकंड 4 करोड़ बार आपस में टकरायेंगे. उन्हें उनके सही रास्ते पर दौड़ाने वाले चुंबकों को ठंडा रखने के लिए ऋण 270 डिग्री ठंडे तरल हीलियम की सहायता ली जायेगी.  त्वरण रिंग में होने वाली टक्कर को दर्ज करने के लिए सौ मीटर की गहराई पर चार बड़े-बड़े डिटेक्टर लगाये गये हैं. इन में एटलस नाम का सबसे बड़ा डिटेक्टर 25 मीटर व्यास वाला 46 मीटर ऊँचा एक विशालकाय यंत्र है. प्रटोनों की टक्कर और इस टक्कर से बनने वाले नये कणों को आँखों से देखा नहीं जा सकता, क्योंकि एक तो यह टक्कर एक सेकंड से भी लाखों-करोड़ों गुना अल्पकाल में पूरी हो जाती है और दूसरे, टक्कर से बने नये कण और भी कम समय में तुरंत बिखर जाते हैं.

डिक्टेर ऐसे महाकाय कैमरे हैं, जो बिखर रहे टुकड़ों की संख्या और उनके उड़नमार्ग को तुरंत माप सकते हैं. इन आँकड़ों की सहायता से वैज्ञानिक बाद में हिसाब लगा सकते हैं कि प्रोटोनों की टक्कर के समय कौन से नये कण-उपकण बने और बिखरे. इसी से यह सुराग भी मिल सकता है कि क्या उनके बीच हिग्स-बोसोन भी थे.

"एल एच सी और एटलस-जैसी परियोजनाओं पर कई-कई पीढ़ियों तक काम चालता है. मैं भाग्यशाली हूँ कि उस पीढ़ी के लिए काम कर रहा हूँ, जो इस डिटेक्टर और इस एक्सिलरेटर को चालू होते देखेगी. हमें दिलचस्प परिणाम और रोचक चीज़ें देखने को मिलेंगी." -जर्मन वैज्ञानिक क्लाउस बार्ट

रहस्यमयी पदार्थ

हिग्स-बोसोन के अलावा एक और ऐसे नये अतिसूक्ष्म मूलकण को लेकर वैज्ञानिक उत्साहित ह