Friday, July 18, 2008
प्यार को कभी भी किया नहीं जा सकता।
प्यार तो अपने आप हो जाता है।
दिन और रात... धरती और आसमान, एक दूसरे के बिना सब अधूरे हैं।
सन -सन करती हवाएं, सुन्दर नजारे, फूलों की खुशबू ... सभी में छिपा होता है प्यार...
कुछ तो प्यार में हारकर भी जीत जाते हैं,
तो कुछ जीतकर भी अपना प्यार हार जाते हैं।
प्यार एक ऐसा नशा है जिसमें जो डूबता है वो ही पार होता है।
प्यार पर किसी का वश नहीं होता....
अगर आप भी प्यार महसूस करना चाहते हैं तो डूबिये किसी के प्यार में ...
दुनिया की सबसे बड़ी नेमत है ढाई आखर का प्यार...
जब आप भी किसी को चाहने लगते हैं तो उसके दूर होने पर भी आपको नजदीक होने का अहसास होने लगता है ,
हर चेहरे में आप उसका चेहरा ढूंढने की असफल कोशिश करते हैं,
कोई पल ऐसा न गुजरता होगा जब उसका नाम आपके होठों पर न रहता हो ...
यही तो होता है प्यार...
सुन्दर, सुखद , निश्छल और पवित्र अहसास।
पूरी दुनिया के सुख इस प्रेम में समाए हुए हैं।
यह शब्द छोटा होते हुए भी सभी शब्दों में बड़ा महसूस होता है।
केवल इतना सा अहसास मात्र ही आपको तरंगित कर देगा कि मैं उससे प्यार करता या करती हूं
 
Mind it............
Friday, July 18, 2008 9:48:04 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया
बात निकली तो हर एक बात पे रोना आया
हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं
उनको क्या हुआ आज, यह किस बात पे रोना आया
किस लिए जीते हैं हम किसके लिए जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया
कौन रोता है किसी और की खातिर ए दोस्त!
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया

देखा है जिंदगी को कुछ इतना क़रीब से
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से
ऐ रूहे-उम्र जाग, कहां सो रही है तू
आवाज दे रहें पयम्बर सलीब से
इस रेंगती हयात का कब तक उठाएं बार
बीमार अब उलझने लगे हैं तबीब से

तुम अपना रंजो-ओ-ग़म, अपनी परेशानी मुझे दे दो
तुम्हें उन की क़सम, ये दुख ये हैरानी मुझे दे दो
मैं देखूं तो सही, दुनिया तुम्हें कैसे सताती है
कोई दिन के लिए अपनी निगहबानी मुझे दे दो
ये माना मैं क़ाबिल नहीं हूं इन निगाहों में
बुरा क्या है अगर इस दिल की वीरानी मुझे दे दो
वो दिल जो मैंने मांगा था मगर ग़ैरों ने पाया था
बड़ी शै है अगर उस की पशेमानी मुझे दे दो

मैं जिंदगी का साथ निभाता चला गया,
हर फिक्र को धुंए में उड़ाता चला गया,
बरबादियों का सोग मनाना फिजूल था
बरबादियों का जश्न मनाता चला गया,
जो मिल गया उसी को मुकद्दर समझ लिया,
जो खो गया मैं उस को भुलाता चला गया,
गम और खुशी में फर्क न महसूस हो जहां
मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया

:: साहिर लुधयानवी...

Friday, July 18, 2008 9:35:36 PM (India Standard Time, UTC+05:30)

तुझे दिल में बसाना चाहता हूँ
तुझे अपना बनाना चाहता हूँ

ज़रा भी दूर हो आँखों से जब तू
मैं मिलने का बहाना चाहता हूँ

मेरी आँखों में है तस्वीर तेरी
जिसे तुझ को दिखाना चाहता हूँ

जो गहरी झील सी आँखें है तेरी
में इन में डूब जाना चाहता हूँ

जो बरसों की है दूरी तुझमें मुझमें
में लम्हों में मिटाना चाहता हूँ

घटा सावन की तू मैं खेत सूखा
मैं प्यास अपनी बुझाना चाहता हूँ

ग़मों से उमर भर पाला पड़ा है
मैं अब हँसना हँसाना चाहता हूँ

ग़ज़ल है तू मेरी मैं तेरा शायर
तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ

Friday, July 18, 2008 9:33:52 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
झिलमिल सी एक लड़की
हवा के संग - संग लहराती सी
कुछ - कुछ नाराज़ ज़िंदगी से
और कुछ - कुछ ज़िंदगी पे मुस्कुराती सी !

किनारे की लहरों सी उठती बिखरती
नाव के जैसे डगमगाती सी
अंधेरे में पानी के किनारे कहीं
जुग्नो - ओं के संग जगमगाती सी !

ख्यालों में खोकर लातों को अपनी
कभी सुलझती कभी उलझती सी
नजाकत से जुल्फों को झटक फ़िर अपनी
धीमे से पलकें झुकाती सी !

चंचल सी नज़रें हस पडें जब अचानक
उस हसी को हया से फ़िर छुपाती सी
जो नाराज़ हो तो आँखें फैलाकर
गुस्से से मुहँ फुलाती सी !

कभी लफ्ज़ के सहारे छु लेती दिल को
कभी नज़रों से ही दास्तानें सुनती सी
कभी मुश्किलों से न डरने वाली
अंधेरे में मासूमियत से घबराती सी !

झिलमिल सी वो एक लड़की
परदे के पीछे शर्माती सी
एक पल को नज़र मिलाके मुझसे
नज़र के साथ दिल भी चुराती थी
Friday, July 18, 2008 9:05:29 PM (India Standard Time, UTC+05:30)
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