Sunday, November 02, 2008

दोस्तों मै आज, एक अपनी महिला मित्र की रचना यहाँ लिख रहा हु....

अब इसे रचना कह कर मैं इसका मजाक नहीं उडाना चाहता, ये उस की दिल की एक आवाज है...
वैसे ये बहुत कम लिखती है लेकिन जब भी लिखती है तो बहुत अच्छा लिखती है। दिल को छू लेता है॥

आज फ़िर आंखो में नमी सी थी,
आज फ़िर कयी "इल्ज़ाम" लगे हैं तेरे जाने के बाद,
कितना अजीब रिश्ता है तेरा मेरा कि, आज भी लोग ताने देते है मुझे तेरे नाम से,
और याद दिलाते है कि हम कभी साथ थे........
फ़िर से माँ ने कहा मुझे तेरे लिये, पर उन्हे नहीं पता अब "अब साथ" नही...........
एक आँसु था बस इन आँखों में, और कुछ नही..........

---------------------------------------------------------------------------

 

Search
Navigation
On this page....
Archives
<November 2008>
SunMonTueWedThuFriSat
2627282930311
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30123456
Aggregate Me!
Feed your aggregator (RSS 2.0)
Categories
Blogroll
Contact me
Send mail to the author(s) E-mail
Themes
Pick a theme:
Administration