करवट की वजह से जब भी नींद खुल जाती है तो अधूरे ख्वाबों को पकड़ने की कोशिश करता हूँ. कभी मन करता है की खुले आकाश के नीचे बस हाथ फैलाये बिना कुछ कहे घंटों खड़ा रहूँ. या कभी इन चंचल तितलियों के पंखों पर सवारी करने को मन करने लगता है. उनींदी आंखों से जो भी देखता हूँ सच मान लेता हूँ. मुझे कभी पहाड़ लुभाते हैं तो कभी लोग. लोगों को जानने, उनसे बात करने की, उन्हें सुनने की ख्वाहिश सदा साथ रहती है. कुछ भी जो लीक से हटकर है मुझे पसंद है.
ज़िन्दगी को हमेशा पर्दे में ही मिलता हूँ, सुना है बहुत खूबसूरत है वो.