
Friday, August 29, 2008
वो देख ना चाँद को, कितना चमकता हैं माँ.....
नीचे क्यों नहीं आता, क्या वो इतना डरता हैं माँ....
रोज़ रात को सपना आता हैं मुझे,
खुदा भी धरती पर उतरता हैं माँ...
तू जब भी मुँह खोलती हैं,
तब मुझसे वो बात करता हैं माँ....
ये आँखे क्यों भीग गयी तेरी,
क्यों आंसू पलकों पे ठहरता हैं माँ,
उधर देख वो चिडियों का घर,
वो चूजा कितना इतरता हैं माँ...
तू मुझे अकेला तो नहीं छोडेगी?
मेरा वक्त तुझ ही से गुज़रता हैं माँ...
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