कभी महसूस करो मुझे..
मेरे साथ बेठो, बाते करो..
ख्याल ज़िन्दा हो उठेगे कि..
मैं ख्वाब देता हूँ..
शाम कि दहलीज़ से निकलकर..
रात के सिराहने से गुज़रता हुआ..
तुम्हारी हसीन आंखो का गुलाम..
तुम्हारी पलको पे रहता हुं...
महसूस करो मुझे भी कभी कि..
मैं ख्वाब देता हूँ..
यादों की उंगली पकड कर..
पलको की तामीर से फिसल कर...
होंठो पे मुस्कान बनकर..
हर दम तुम्हें खुश रखता हुं..
महसूस करो मुझे भी कभी कि...
मैं ख्वाब देता हूँ....
मैं वही हूँ , जिसे किसी दुआ में मांगा तुमने..
मैं वही हूँ, जिसे खुदा ने तुम्हें बक्शा..
बचपन की नामुराद चाहत का, नतीजा हुं मैं....
बचपन से हर वक्त तुम्हारे साथ रहता हुं..
अब तो महसूस करो मुझे भी कभी कि..
मैं ख्वाब देता हूँ....