
Monday, August 18, 2008
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मंजिल मिली, मुराद मिली, मुद्दआ मिला सब कुछ मुझे मिला जो तेरा नक्श-ए-पा मिला - सीमाब अकबराबादी |
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अब क्या बताऊं मैं तेरे मिलने से क्या मिला इरफान-ए-गम हुआ मुझे दिल का पता मिला - सीमाब अकबराबादी |
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बात साकी की न टाली जाएगी करके तौबा तोड़ डाली जाएगी - हबीब जलील |
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गम मुझे, हसरत मुझे, वहशत मुझे, सौदा मुझे एक दिल देके खुदा ने दे दिया क्या क्या मुझे - सीमाब अकबराबादी |
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दुश्मन को भी सीने से लगाना नहीं भूले हम अपने बुजुर्गों का जमाना नहीं भूले - सागर आजमी |
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मैयत न मेरी जा के वीराने में रख देना पैमानों में दफना के मैखाने में रख देना - सीमाब अकबराबादी |
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कांटों से गुजर जाना, शोलों से निकल जाना फूलों की बस्ती में जाना तो संभल जाना - सागर आजमी |
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किस-किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया गैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया - शहरयार |
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मैनोशी के आदाब से आगाह नहीं है तू जिस तरह कहे साकी-ए-मैखाना पिए जा - अख्तर शीरानी |
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मैं नजर से पी रहा हूं, ये समां बदल न जाए न झुकाओ तुम निगाहें, कही रात ढल न जाए - अनवर मिर्जापुरी |
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पहलू से दिल को लेके वो कहते हैं नाज से क्या आएं घर में आप ही जब मेहरबां न हों - मौलाना मुहम्मद अली जौहर |
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सारी दुनिया सो जाती है, मैकश हम उठकर रोते हैं किस तरह गुजरती हैं रातें, तुम क्या समझो, तुम क्या जानो - मैकश |
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